सर्पदंश से मौत के मुंह में पहुँचे 14 वर्षीय बालक नेमीचंद को मिला जीवनदान

सर्पदंश से मौत के मुंह में पहुँचे 14 वर्षीय बालक नेमीचंद को मिला जीवनदान

0- 10 दिनों के गहन इलाज के बाद अस्पताल से हुई छुट्टी
बालोद. जिला अस्पताल बालोद के चिकित्सकों ने उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं और बेहतरीन टीमवर्क का एक बड़ा उदाहरण पेश किया है। वाइपर सांप के डसने के कारण अत्यंत गंभीर हालत में अस्पताल पहुँचे डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम तुमडीशुर के 14 वर्षीय बालक की जान बचाने में स्वास्थ्य विभाग की टीम को बड़ी सफलता मिली है। मरीज को लगभग 10 दिनों तक सघन निगरानी और गहन चिकित्सा में रखा गया, जिसके बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। सिविल सर्जन डॉ. श्रीमाली ने बताया कि ग्राम तुमडीशुर निवासी 14 वर्षीय बालक नेमीचंद को वाइपर सांप ने डस लिया था, जिसके बाद स्थिति बिगड़ने पर उसे 02 अगस्त 2026 को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सांप के जहर के कारण नेमीचंद के निचले पैर में गंभीर सेलुलाइटिस फैल गया था। स्थिति इतनी जटिल हो गई थी कि मरीज को एक्यूट किडनी इंजरी और यूरेमिक एन्सेफैलोपैथी जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। किडनी की कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित होने के कारण डॉक्टरों को मरीज का तीन बार डायलिसिस करना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस चुनौतीपूर्ण केस के प्रबंधन में अस्पताल के विभिन्न विभागों ने आपसी समन्वय से काम किया। मरीज के इलाज में डॉ. महेंद्र रावटे, डॉ. अविनाश मंडावी एवं डॉ. नुरेंद्र साहू के विशेष भूमिका रही। इन विशेषज्ञ डॉक्टरों के अलावा, डायलिसिस यूनिट और मेडिसिन विभाग के नर्सिंग स्टाफ ने भी मरीज की लगातार निगरानी, सही समय पर दवाओं का प्रशासन और डायलिसिस के दौरान विशेष देखभाल सुनिश्चित कर इस सफलता में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
बड़े सेंटर में रेफर करने के बजाय जिले में ही मिला उच्च स्तरीय इलाज
लगभग 10 दिनों के सघन उपचार के बाद नेमीचंद की स्थिति में संतोषजनक सुधार देखा गया, जिसके बाद 10 अगस्त 2026 को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। यह उपलब्धि जिला अस्पताल बालोद की मल्टी-स्पेशियलिटी टीमवर्क एवं गंभीर मरीजों के प्रबंधन की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। आमतौर पर एक्यूट किडनी इंजरी और यूरेमिक एन्सेफैलोपैथी जैसी गंभीर जटिलताओं वाले मामलों को उच्चतर चिकित्सा केंद्रों (हायर सेंटर) में रेफर कर दिया जाता है, लेकिन बालोद जिला अस्पताल में आवश्यक विशेषज्ञता, डायलिसिस सुविधा और समर्पित चिकित्सकीय टीम के होने से मरीज को सही समय पर इलाज मिल सका और उसकी जान बच गई।