रायपुर सेंट्रल जेल में गायत्री परिवार ने मनाया अनोखा रक्षाबंधन: अपनों से दूर बंदियों के सूने हाथों में सजा विश्वास का धागा

रायपुर सेंट्रल जेल में गायत्री परिवार ने मनाया अनोखा रक्षाबंधन: अपनों से दूर बंदियों के सूने हाथों में सजा विश्वास का धागा
-गायत्री परिवार का संदेश : भूल सुधारकर श्रेष्ठ जीवन की शुरुआत
 रायपुर:। परिवार और समाज की मुख्यधारा से दूर रहकर अपनी गलतियों का प्रायश्चित कर रहे बंदियों के जीवन में इस रक्षाबंधन आत्मिक उजियारा फैल गया। अखिल विश्व गायत्री परिवार, रायपुर के तत्वावधान में केंद्रीय जेल रायपुर में एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायी रक्षाबंधन पर्व मनाया गया, जिसने पत्थर से दिल को भी पिघला दिया। बहनों के आंचल की छांव और ममता भरे अहसास ने जेल में बंद बंदियों में सलाखों के दर्द को कुछ पल के लिये भुला दिया। इस आत्मीय आयोजन के दौरान गायत्री परिवार की बहनों ने लगभग 200 बंदी भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। राखी बंधवाते ही कई बंदी भाइयों के सब्र का बांध टूट गया और उनकी आंखों से छलक आए आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि भाई-बहन का यह पवित्र बंधन हर दूरी और हर दीवार से बहुत ऊपर है।
इस अवसर पर केवल रस्म अदायगी नहीं हुई, बल्कि बंदियों के मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान पर विशेष जोर दिया गया। गायत्री परिवार की ओर से सभी को सत्संकल्प का पाठ कराया गया। जिला समन्वयक श्री लच्छुराम निषाद ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि, “कानून की नजर में भले ही व्यक्ति अपराधी हो सकता है, लेकिन ईश्वर की नजर में हर आत्मा में सुधार की असीम संभावना होती है। जेल कोई अंत नहीं, बल्कि खुद को टटोलने और एक नया इंसान बनकर उभरने का स्वर्णिम अवसर है।” उन्होंने युगदृष्टा पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों का स्मरण कराते हुए कहा कि सद्विचार, सदाचार और आत्मसंयम ही मनुष्य के सबसे बड़े आभूषण हैं।
कार्यक्रम का सबसे मर्मस्पर्शी क्षण वह था जब गायत्री परिवार की बहन श्रीमती प्रेमलता चंद्राकर ने ममता और भाई-बहन के स्नेह से ओत-प्रोत भावुक गीत प्रस्तुत किया। सुरों की उस रागमय पुकार ने जेल के उस कठोर माहौल को पूरी तरह भावनात्मक बना दिया। अपनों से बिछड़ने का दर्द और बहनों का अहेतुकी प्रेम देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
जेल के भीतर इस सकारात्मक और पारिवारिक माहौल को तैयार करने में केंद्रीय जेल अधीक्षक श्री योगेश क्षत्रिय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके विशेष मार्गदर्शन और प्रशासनिक सहयोग से ही इस आध्यात्मिक अनुष्ठान को इतने अनुशासित और भव्य रूप में मूर्त रूप दिया जा सका।
आयोजन को सफल बनाने में प्रोटोकॉल एवं मीडिया प्रभारी श्री अमित डोये, श्रीमती प्रेमलता चंद्राकर, श्रीमती अनोखी निषाद, श्रीमती कीर्ति चंद्रा, श्रीमती गीता शर्मा, श्रीमती द्रोपति यदु, कु. गायत्री शर्मा, श्रीमती उमा केशरवानी, श्रीमती पूर्णिमा साहू, श्री घनश्याम केशरवानी, श्री उमेंद्र यदु एवं श्री देवेंद्र कुमार निषाद सहित समस्त गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं ने अपनी सेवाएँ दीं।
यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि गायत्री परिवार का उद्देश्य केवल पर्व मनाना नहीं, बल्कि पतितों और उपेक्षितों के जीवन में उजाला भरकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।