वनांचल की गृहिणी कुसुम सिन्हा बनीं ‘लखपति दीदी’, राखी कारोबार से 7 लाख रुपए की आय की उम्मीद
-मुख्यमंत्री को विष्णु भैया कहकर, रक्षाबंधन की दी बधाई एवं शुभकामनाएं
बालोद। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली एक साधारण गृहिणी आज आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। बालोद जिले के डौंडी विकासखंड स्थित वनांचल ग्राम कुमुड़कट्टा की श्रीमती कुसुम सिन्हा ने राज्य सरकार की 'बिहान' योजना से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि आज एक सफल ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बनाई है।
श्रीमती कुसुम सिन्हा 'जय मां पहाड़ों वाली स्व-सहायता समूह' की अध्यक्ष हैं, जिसमें 12 महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। समूह के जरिए महिलाएं अचार, रंगोली और मौसमी उत्पादों का निर्माण करती हैं। रक्षाबंधन पर्व के मद्देनजर समूह ने कुछ माह पहले से ही बड़े पैमाने पर पर्यावरण-अनुकूल और पारंपरिक राखियों का निर्माण शुरू किया था।
कुसुम सिन्हा और उनके समूह द्वारा धान, चावल, गेहूं, मूंग, बांस और ऊन से तैयार की जा रही कलात्मक एवं इको-फ्रेंडली राखियों की भारी मांग बालोद सहित आसपास के कई जिलों में है। समूह द्वारा अब तक लगभग 12,000 राखियां बनाकर बेचा जा चुका है। इस सीजन में उन्हें राखी निर्माण से करीब 7 लाख रुपए तक की आय होने की उम्मीद है। आजीविका संवर्धन में उत्कृष्ट कार्य के लिए कुसुम सिन्हा को जिला एवं राज्य स्तर पर 'लखपति दीदी' के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अन्य ग्रामीण महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि घर से बाहर निकलकर स्वरोजगार अपनाने से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में नई पहचान मिलती है।
श्रीमती सिन्हा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को अपने बड़े भाई के रूप में संबोधित करते हुए आभार जताया और उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना और बिहान जैसी पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं—जो “बहनों की तरक्की, परिवार की शान - विष्णु भैया का यही अभियान” के ध्येय को साकार कर रहा है।