मेहनत और हुनर से थैलीटोला की महिलाएं गढ़ रहीं आत्मनिर्भरता की कहानी
- अगरबत्ती-धूप निर्माण से सालाना लगभग 3 लाख रुपए तक की आय अर्जित कर रहीं महिलाएं
मोहला । ग्रामीण परिवेश में रहते हुए भी महिलाएं अपनी मेहनत, हुनर और समूह की एकजुटता से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। विकासखंड अंबागढ़ चौकी के ग्राम थैलीटोला की जय मां लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की 10 महिलाओं ने अगरबत्ती एवं धूप-लुभान निर्माण को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। समूह की महिलाएं इस कार्य से सालाना लगभग 3 लाख रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं।
समूह की अध्यक्ष श्रीमती रिंकी सिन्हा बताती हैं कि कुछ समय पहले तक समूह से जुड़ी सभी महिलाएं घर-परिवार के कार्यों और खेती-किसानी में ही व्यस्त रहती थीं। नियमित आमदनी का कोई अलग साधन नहीं था। बिहान योजना से जुड़ने के बाद महिलाओं को एकजुट होकर अपनी क्षमता और रुचि के अनुरूप स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिला। इसी क्रम में समूह ने अगरबत्ती एवं धूप-लुभान निर्माण का कार्य शुरू किया। श्रीमती सिन्हा ने बताया कि समूह की महिलाओं ने स्वरोजगार को आगे बढ़ाने के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लिया। स्वयं सिद्ध, बीआरसी, बैंक लिंकेज एवं पीएमईजीपी जैसी योजनाओं से मिले सहयोग ने समूह की गतिविधियों को मजबूती प्रदान की। योजनाओं के माध्यम से प्राप्त सहयोग का उपयोग कर महिलाओं ने अपने कार्य को व्यवस्थित किया और उत्पादन बढ़ाते हुए इसे आय के बेहतर साधन के रूप में विकसित किया।
आज समूह की महिलाएं स्वयं अगरबत्ती एवं धूप-लुभान तैयार करने से लेकर उसकी पैकेजिंग और विक्रय तक की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ महिलाएं अपने गांव में ही रोजगार प्राप्त कर रही हैं। इससे उन्हें अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग करने का अवसर भी मिल रहा है।
समूह की अध्यक्ष श्रीमती सिन्हा का कहना है कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले जहां महिलाएं केवल घरेलू कार्यों और खेती-किसानी तक सीमित थीं, वहीं अब वे स्वयं रोजगार का संचालन कर रही हैं और अपनी मेहनत से आमदनी अर्जित कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि समूह द्वारा बनाए गए अगरबत्ती एवं धूप-लुभान को जिले के बाजारों, दुकानों तथा शासन द्वारा आयोजित सरस मेलों में जाकर विक्रय किया जाता है। समूह की महिलाएं अपने व्यवसाय का और विस्तार करने तथा अधिक से अधिक बाजारों तक अपने उत्पाद पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। मेहनत, हुनर और शासन की योजनाओं से मिले सहयोग के बल पर थैलीटोला की ये महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर लगातार आगे बढ़ रही हैं।