सोंढूर नदी के तट पर मध्यप्रदेश के बाइकर्स ने लिया प्रकृति पर्यटन और कैंपिंग का रोमांचक अनुभव

सोंढूर नदी के तट पर मध्यप्रदेश के बाइकर्स ने लिया प्रकृति पर्यटन और कैंपिंग का रोमांचक अनुभव
 -चांदनी रात में नाइट ट्रेकिंग, बर्डवॉचिंग, नेचर वॉक और स्थानीय व्यंजनों का उठाया लुत्फ, ग्रामीण संस्कृति से भी हुए रूबरू
 धमतरी ।छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और पर्यटन की विविध संभावनाएं अब दूसरे राज्यों के पर्यटकों को भी आकर्षित कर रही हैं। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश से आए बाइकर्स के एक समूह ने 28 अक्टूबर को घीकुड़िया गांव के समीप सोंढूर नदी के तट पर कैंपिंग कर प्रकृति पर्यटन (नेचर टूरिज्म) का अनूठा अनुभव प्राप्त किया। नदी का विस्तृत रेतीला तट, चांदनी रात, आसपास की हरियाली और प्राकृतिक परिवेश इस रोमांचक यात्रा के विशेष आकर्षण रहे।
 निरई माता पर्यटन समिति के आयोजन में संपन्न इस गतिविधि की खास बात यह रही कि कैंपिंग की पूरी व्यवस्था स्थानीय युवाओं ने स्वयं संभाली। उन्होंने कैंप स्थल तैयार करने से लेकर टेंट लगाने, पर्यटकों की मेजबानी, भोजन और विभिन्न गतिविधियों के संचालन तक सक्रिय भागीदारी निभाई। इससे ग्रामीण युवाओं की संगठन क्षमता और स्थानीय स्तर पर पर्यटन आधारित आजीविका विकसित करने की संभावनाएं भी सामने आईं।
कैंपिंग के दौरान बाइकर्स ने सोंढूर नदी के रेतीले तट पर टेंट लगाकर रात्रि विश्राम किया। स्थानीय देसी व्यंजनों का स्वाद लेने के साथ बर्डवॉचिंग, नेचर वॉक और प्रकृति अवलोकन जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया। चांदनी रात में नदी के तट पर नाइट ट्रेकिंग ने इस यात्रा को यादगार बना दिया। खुले आसमान के नीचे आयोजित स्टोरीटेलिंग सेशन में प्रतिभागियों ने अपने यात्रा अनुभव और रोमांचक संस्मरण साझा किए।
 इस दौरान समूह ने सरई बाबा के दर्शन एवं भ्रमण भी किया। घीकुड़िया गांव के ग्रामीणों से संवाद कर उनकी जीवनशैली, परंपराओं, खानपान और स्थानीय संस्कृति को भी करीब से जाना। इस तरह यह यात्रा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रकृति और ग्रामीण जीवन के साथ जुड़ने का अवसर भी बनी।
 सोंढूर नदी का प्राकृतिक सौंदर्य, शांत तट, जैव विविधता और आसपास की सांस्कृतिक विरासत इसे रिवर साइड कैंपिंग, बाइकिंग टूरिज्म, बर्डवॉचिंग, नेचर वॉक और ग्रामीण पर्यटन के लिए संभावनाशील गंतव्य बनाते हैं। ऐसे आयोजनों से स्थानीय युवाओं को रोजगार, ग्रामीण उत्पादों एवं पारंपरिक व्यंजनों को बाजार और गांवों की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंच मिल सकता है। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
 कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि धमतरी जिले में प्राकृतिक सौंदर्य, जल संसाधन, वन संपदा और समृद्ध जनजातीय एवं ग्रामीण संस्कृति के रूप में पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। जिला प्रशासन द्वारा पर्यटन स्थलों की पहचान, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और ग्रामीण युवाओं को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित करना और जिले की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए पहचान दिलाना भी है। घीकुड़िया में स्थानीय युवाओं द्वारा आयोजित यह कैंपिंग गतिविधि सामुदायिक पर्यटन की भावना को आगे बढ़ाने वाली पहल है। ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित कर धमतरी को प्रकृति, रोमांच और ग्रामीण संस्कृति से जुड़े पर्यटन के आकर्षक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।