छत्तीसगढ़ महतारी

छत्तीसगढ़ महतारी

स्वरचित - डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
जिनगी के हर सांस जेखर अभारी हे ।
सब ल पोसैया छत्तीसगढ़ महतारी हे ।।
तरिया नदिया रुख राई  के कोरा म ।
टिन लोहा धन धान भरे हे पोरा म ।
जुरमिल के रहिथें जम्मो संगवारी हे ।।
सब ल पोसैया छत्तीसगढ़ महतारी हे ।।
सुनता के सुरुज ह उगथे , चंदा लोरी गाथे ।
महानदी गंगा सन पावन , पुरखा सब तर जाथे ।
 खेत खार मा तीरथ सरग दुआरी हे ।।
सब ल पोसैया छत्तीसगढ़ महतारी हे ।।
उत्तर दक्षिण सबो डहर के , मनखे मिलजुल रहिथें ।
रोजी रोटी पाथें बसथे  , भाखा मन के कहिथें ।
सुनता के एहर सुघ्घर फुलवारी हे ।।
सब ल पोसैया छत्तीसगढ़ महतारी हे ।।
चंदन जइसन एखर माटी  माथा म लगावव ।
सीमा ठाढ़े सैनिक ला, तुम कभू झन भुलावव ।
प्राण गंवा के जउन करत  रखवारी हे ।
सब ल पोसैया छत्तीसगढ़ महतारी हे ।।