हिंदी प्यारी भाषा

हिंदी प्यारी भाषा

- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
14 सितंबर हिंदी दिवस विशेष 
विश्व रहा स्वीकार इसे अब , हिंदी प्यारी भाषा है ।
बाँध लिया मन स्नेह-सूत्र में , जन-जन की प्रत्याशा है ।
सरल-सहज यह पावन धारा , लेकर सबको साथ चली ।
राष्ट्र-धर्म की सीमा लाँघी , प्रचलित होती गाँव-गली ।
जीत लिया मन सबका इसने ,सुखदायी अभिलाषा है ।।
विश्व रहा स्वीकार इसे अब , हिंदी प्यारी भाषा है ।।
देवनागरी लिपि अद्भुत है , सुंदर सुगढ़ शिल्प-शैली ।
अनुपम शब्द-नाद अनुशासित , अंतर्मन तक जड़ फैली ।
अर्थ नवल संदर्भ शुभोचित , गढ़े नई परिभाषा है ।।
विश्व रहा स्वीकार इसे अब , हिंदी प्यारी भाषा है ।।
उन्नत रूप व्याकरणसम्मत ,दृष्टिकोण है वैज्ञानिक ।
शब्दकोश समृद्ध अति व्यापक , भावमयी यह वैधानिक ।
संस्कारों की बनी वाहिका , जागृत ज्ञान-पिपासा है ।।
विश्व रहा स्वीकार इसे अब , हिंदी प्यारी भाषा है ।।