नई दिल्ली। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के तहत योजना की शुरुआत से अब तक करीब 18.45 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि करीब 12.35 लाख अभ्यर्थियों को रोजगार मिला है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत संचालित इस योजना का उद्देश्य प्लेसमेंट से जुड़े कौशल कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को रोजगार योग्य बनाना और उनके लिए सतत आजीविका के अवसर बढ़ाना है। यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
उद्योग की बदलती जरूरतों और रोजगार के उभरते अवसरों को देखते हुए डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के संशोधित दिशा-निर्देश वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू किए गए हैं। इनमें उद्योग-संचालित प्रशिक्षण, सतत रोजगार, नियोजन पश्चात सहायता, कौशल उन्नयन और पुनर्कौशलन के अवसर तथा प्रशिक्षण वितरण में अधिक लचीलापन शामिल है। इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) रखरखाव, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवा, देखभाल आधारित अर्थव्यवस्था, खुदरा, आतिथ्य और मीडिया एवं मनोरंजन जैसे उभरते क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
डीडीयू-जीकेवाई के तहत परिधान, ऑटोमोटिव, सौंदर्य एवं वेलनेस, निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवा, आतिथ्य, आईटी-आईटीईएस, लॉजिस्टिक्स, खुदरा, दूरसंचार तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षित युवाओं के नियोजन को उद्योग साझेदारियों, नियोक्ता समझौतों, रोजगार मेलों, कैंपस प्लेसमेंट अभियानों, उद्योग परामर्शों और सेक्टर स्किल काउंसिलों एवं नियोक्ताओं के साथ समन्वय के जरिए सुगम बनाया जाता है।
योजना के तहत प्लेसमेंट से जुड़े परिणामों के साथ पाठ्यक्रम तैयार करने और प्रशिक्षण देने में उद्योग की निरंतर भागीदारी को अनिवार्य किया गया है। उद्योगों के साथ समन्वय सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक राज्य और संघ राज्य क्षेत्र में कैप्टिव नियोक्ताओं के लिए लक्ष्यों का 20% आवंटन किया गया है। इसके अलावा, परियोजना कार्यान्वयन अभिकरणों (पीआईए) को बैच मोड भुगतान छह महीने की सफल अनिवार्य नियोजन अवधि से जोड़ा गया है।
डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में रोजगार के स्थायित्व और टिकाऊपन को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत एक वर्ष की नियोजन पश्चात निगरानी एवं सहायता, परामर्श, प्रवासन सहायता, पूर्व छात्रों से जुड़ाव और शिकायत निवारण तंत्र जैसी व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं। साथ ही, कौशल उन्नयन और पुनर्कौशलन के अवसर भी दिए जाएंगे। संशोधित ढांचे में न्यूनतम 70% प्लेसमेंट का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अधिकतम 20% स्वरोजगार या गिग रोजगार को शामिल किया जा सकता है, बशर्ते रोजगार कम से कम छह महीने तक बना रहे।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 1.37 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 750 करोड़ रुपए का बजट अनुमान रखा गया है। इसके अलावा, राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को 361.96 करोड़ रुपए की मूल स्वीकृति जारी की गई है। राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा अब तक 50.89 करोड़ रुपए का व्यय किया जा चुका है।
मध्य प्रदेश में डीडीयू-जीकेवाई का कार्यान्वयन मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एमपीएसआरएलएम) के माध्यम से किया जा रहा है। योजना की शुरुआत से अब तक राज्य में करीब 93 हजार अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि करीब 56 हजार अभ्यर्थियों को रोजगार मिला है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मध्य प्रदेश को 10 करोड़ रुपए की मूल स्वीकृति जारी की गई है।
ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत योजना की शुरुआत से अब तक ग्वालियर जिले में 1,909 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया, जिनमें से 701 को रोजगार मिला। वहीं, शिवपुरी जिले में 944 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया गया और 579 अभ्यर्थियों को रोजगार मिला है।