स्वामित्व योजना के तहत दुर्ग जिले में ग्रामीण आबादी भूमि का सर्वेक्षण और अधिकार अभिलेख वितरण का कार्य प्रगति पर
0- चालू राजस्व वर्ष में अब तक 105 ग्रामों के 20,602 हितग्राहियों को सौंपे गए ई-अधिकार अभिलेख
0- जीआईएस और ड्रोन तकनीक से पारदर्शी भू-मापन के जरिए सीमा विवादों का होगा स्थायी समाधान
0- ग्रामीणों को मिल रहा कानूनी स्वामित्व हक, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही है गति
दुर्ग. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि के पारदर्शी भू-मापन और ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का कानूनी हक दिलाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री अभिजित सिंह के मार्गदर्शन में दुर्ग जिले में 'स्वामित्व योजना' का क्रियान्वयन व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई इस महत्वाकांक्षी योजना को राज्य शासन की मान्यता के तहत छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 67 के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी भूमि का जीआईएस प्रणाली और ड्रोन तकनीक के माध्यम से सटीक सर्वेक्षण कर अधिकार अभिलेख तैयार करना है, जिससे ग्रामीण संपत्तिधारकों को भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र प्रदान किया जा सके।
योजना के सफल संचालन और अंतिम प्रकाशन के अंतर्गत दुर्ग जिले की विभिन्न तहसीलों के ग्रामों को शामिल किया गया है। इस क्रम में जिला दुर्ग के अंतर्गत विभिन्न तहसीलों के ग्राम शामिल हैं, जिसमें तहसील दुर्ग के अंतर्गत ग्राम दमोदा, चिरपोटी, कुठेलाभाठा, कातरो, खाड़ा, नगपुरा, बेलोदी, मालूद, भटगांव, खपरी, खेदामारा, बासीन, झेंझरी, भरदा, कुथरेल, कोनारी, अछोटी, अण्डा एवं गनियारी शामिल हैं। वहीं तहसील बोरी के अंतर्गत ग्राम गाड़ाडीह, चिखला, चीचा, टेकापार, टेमरी, डोडकी, डोमा, तुमाखुर्द, देउरकोना, दनिया, पथरिया, पुरदा, परसदा, परसदाखुर्द, पोटिया, फुण्डा, बिरेझर, बोरीबुजर्ग, मड़ियापार, सुखरीकला, सेवती, सिलतरा, हसदा, हिरीं, करेली, लिटिया, नवागांव, रौता, सेमरिया, जोगीगुफा, खर्रा एवं अरसी को शामिल किया गया है।
इसी प्रकार तहसील पाटन के अंतर्गत ग्राम उफरा, आँधी, औरी, करेला, कोपेडीह, खोला, गबदी, घुघवा, जमराव, डगनिया, दरबारमोखली, नारधी, पुनईडीह, पन्दर, परसाही, पाहंदा, फंडा, बासीन, बोरवाय, बोहारडीह, मटिया, मोहभट्ठा, रूही, मानिकचौरी, कापसी, मोतीपुर, बटंग, औरी, भांठागांव, जामगांव (एम), गोड़पेन्ड्री, छाटा, गाडाडीह, बोदल, मटंग, ठकुराईनटोला, सिनकोन्हा, धमना, चारभाठा, भैंसबोड, मुडपार, महकाकला, चुनकट्टा, भरर, भनसुली, कुरूदडीह, गुढियारी, आमालोरी, कानाकोट, बोरेन्दा, खम्हरिया, महुदा, कौही, चंगोरी, सांकरा, जांमगांव (आर) एवं देवादा शामिल हैं। तहसील धमधा के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में अकोली, कन्हारपुरी, करेली, दानीकोकड़ी, दारगांव, नंदेली, पैंड्रावन, पेंडरी, पड़ोरा, परसूली, बसनी, बिरझापुर, महाराजपुर, मोतिमपुर, सुखरीखुर्द, सिल्ली, घसरा, गोरपा, ठेलका, रूहा, राजपुर, गोबरा, साल्हेखुर्द, गाडाधार, धूमा, खिलोराखुर्द, खैरझिटी, जाताघर्रा, बिरेभाठ, देवरी, हिरेतरा, भरनी, तरकोरी, रौंदा, सोनेसरार, छिराही, सिरनाभाठा, रक्सा, डगनिया, मुडपार, राहटादाह, तितुरघाट, परसकोल, कुटहा, नवागांव, खिलौराकला, पेण्डरीतराई, कोकडी एवं पेंडरी को सम्मिलित किया गया है। इसके अलावा तहसील अहिवारा के अंतर्गत ग्राम कंडरका, करहीडीह, घटियाखुर्द, डूमर, देऊरझाल, धिकुड़िया, नंदिनी खंदनी, पथरिया, परसदा, पोटिया, मलपुरीखुर्द, सण्डी, मुर्रा, सेमरिया, नंदौरी, रिंगनी, सुरजीडीह, अछोटी, पिटौरा, अहेरी, ढौर, ओटेबंध, मुडपार, मेडेसरा, सहगांव, सगनी, हिगनाडीह एवं कोडिया शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि राजस्व विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग, देहरादून द्वारा संयुक्त रूप से इस सर्वेक्षण कार्य को पूरा किया जा रहा है। इसके तहत सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा ड्रोन के माध्यम से ग्रामीण आबादी क्षेत्र का इमेजरी एकत्र कर ऑर्थाे रेक्टिफिकेशन प्रोसेस किया जाता है, जिसके बाद डिजिटल प्रारूप नक्शा तैयार कर ई-अधिकार अभिलेख जारी किए जाते हैं। योजना के अंतर्गत यदि आबादी क्षेत्र के समीप दखलरहित भूमि पर बसाहटें हैं, तो कलेक्टर द्वारा संहिता की धारा 243 के तहत उसे आबादी भूमि घोषित करने की कार्यवाही की जाती है।
ज्ञात हो कि योजना के शुभारंभ से लेकर अब तक दुर्ग जिले में समग्र रूप से कुल 187 ग्रामों के 38,690 हितग्राहियों का अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं। तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार, तहसील पाटन के 58 ग्रामों के 13,874 हितग्राही, धमधा तहसील के 49 ग्रामों के 6,482 हितग्राही, बोरी तहसील के 32 ग्रामों के 6,707 हितग्राही, अहिवारा तहसील के 29 ग्रामों के 5,746 हितग्राही तथा दुर्ग तहसील के 19 ग्रामों के 5,881 हितग्राही अब तक इस योजना से शामिल हैं। वहीं केवल चालू राजस्व वर्ष (01 अक्टूबर 2025 से अब तक) के आंकड़ों के अनुसार, जिले की 5 तहसीलों के कुल 105 ग्रामों में 20,602 हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख का वितरण सफलतापूर्वक किया गया है। इसमें तहसील पाटन के 34 ग्रामों के 7,920 हितग्राही, धमधा के 33 ग्रामों के 3,569 हितग्राही, अहिवारा के 17 ग्रामों के 3,851 हितग्राही, दुर्ग के 13 ग्रामों के 3,527 हितग्राही तथा बोरी तहसील के 8 ग्रामों के 1,735 हितग्राही शामिल हैं। इस योजना से ग्राम पंचायतों का संपत्ति रजिस्टर तैयार होगा जिससे उनकी स्थायी आय में वृद्धि होगी और संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आएगी। साथ ही ग्रामीण जन अपनी संपत्ति के प्रामाणिक दस्तावेज के आधार पर बैंकों से आसानी से ऋण प्राप्त कर सकेंगे। योजना के पारदर्शी क्रियान्वयन हेतु ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है, जिसमें ग्रामीणों द्वारा सचिव एवं पटवारी को अपनी संपत्ति का ब्योरा उपलब्ध कराया जा रहा है।