जहां जन्म लेती है नई जिंदगी, वहीं गंदगी-जलभराव का अंबार:गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर संक्रमण का खतरा; सीएमएचओ ने दिए स्थायी समाधान के निर्देश
जहां जन्म लेती है नई जिंदगी, वहीं गंदगी-जलभराव का अंबार:गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर संक्रमण का खतरा; सीएमएचओ ने दिए स्थायी समाधान के निर्देश
ग्वालियर जिला अस्पताल मुरार के अधीन संचालित महिला प्रसूति गृह में गंदगी और जलभराव ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। अस्पताल परिसर में जगह-जगह गंदा और बदबूदार पानी जमा है। यह वही प्रसूति गृह है, जहां गर्भवती महिलाओं का इलाज होता है और नवजात शिशुओं का जन्म होता है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल बारिश के कारण हालात और गंभीर हो गए हैं। जलभराव से मच्छरों और बैक्टीरिया के पनपने का खतरा बढ़ गया है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। सबसे अधिक जोखिम गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील होती है। अस्पताल की बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब इलाज देने वाला अस्पताल ही स्वच्छता के बुनियादी मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा है, तो मरीजों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। मामला सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मेघ सिंह सगर ने सिविल सर्जन से चर्चा कर समस्या के स्थायी समाधान के निर्देश दिए हैं। देखिए तस्वीरें
ग्वालियर जिला अस्पताल मुरार के अधीन संचालित महिला प्रसूति गृह में गंदगी और जलभराव ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। अस्पताल परिसर में जगह-जगह गंदा और बदबूदार पानी जमा है। यह वही प्रसूति गृह है, जहां गर्भवती महिलाओं का इलाज होता है और नवजात शिशुओं का जन्म होता है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल बारिश के कारण हालात और गंभीर हो गए हैं। जलभराव से मच्छरों और बैक्टीरिया के पनपने का खतरा बढ़ गया है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। सबसे अधिक जोखिम गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील होती है। अस्पताल की बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब इलाज देने वाला अस्पताल ही स्वच्छता के बुनियादी मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा है, तो मरीजों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। मामला सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मेघ सिंह सगर ने सिविल सर्जन से चर्चा कर समस्या के स्थायी समाधान के निर्देश दिए हैं। देखिए तस्वीरें