दंतेवाड़ा ने रचा राष्ट्रीय इतिहास: प्रधानमंत्री कृषि धन-धान्य योजना के क्रियान्वयन में देश में पाया 5वां स्थान

दंतेवाड़ा ने रचा राष्ट्रीय इतिहास: प्रधानमंत्री कृषि धन-धान्य योजना के क्रियान्वयन में देश में पाया 5वां स्थान

​दंतेवाड़ा। दक्षिण बस्तर के वनांचल क्षेत्र दंतेवाड़ा ने कृषि विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता के क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया है। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री कृषि धन-धान्य योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन, निर्धारित प्रमुख संकेतकों (KPIs) की शत-प्रतिशत प्रविष्टि एवं अद्यतन मूल्यांकन में दंतेवाड़ा जिले ने पूरे देश में 5वां स्थान हासिल किया है।
​देशभर के चयनित 100 जिलों के कड़े आकलन में दंतेवाड़ा समूचे छत्तीसगढ़ का एकमात्र ऐसा जिला बनकर उभरा है, जिसने राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष 10 (Top 10) में अपनी जगह सुनिश्चित की है। यह सफलता केवल प्रशासनिक आंकड़ों की जीत नहीं, बल्कि बस्तर के खेतों में उपज रही आर्थिक स्वावलंबन की नई गाथा है।
​सफलता के प्रमुख आधार: खेतों से लेकर डिजिटल पोर्टल तक जमीनी कार्य
​दंतेवाड़ा जिले को मिली इस ऐतिहासिक 5वीं रैंक के पीछे योजना के विभिन्न घटकों पर किया गया ठोस कार्य है:
​शत-प्रतिशत डिजिटल ट्रैकिंग व पारदर्शिता: योजना के तहत निर्धारित सभी Key Performance Indicators (KPIs) का समयबद्ध संकलन, सत्यापन और पोर्टल पर 100% सटीक प्रविष्टि सुनिश्चित की गई। मैदानी अमले की सक्रियता से योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचा।
​मिलेट्स (मोटा अनाज) एवं पारंपरिक फसलों का पुनरुद्धार: दंतेवाड़ा की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोदो-कुटकी, रागी और देशी धान की किस्मों के उत्पादन को वैज्ञानिक तरीकों से बढ़ावा दिया गया।
​जैविक खेती और मिट्टी स्वास्थ्य सुधार: जिले में रासायनिक खादों की जगह वर्मीकंपोस्ट और प्राकृतिक जीवामृत के उपयोग पर जोर दिया गया। इसके साथ ही मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के आधार पर किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन की सलाह दी गई।
​जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई: धन-धान्य योजना के तहत जल संचयन संरचनाओं (चेकडैम, डबरी) के विकास के साथ ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को प्रोत्साहित किया गया, जिससे किसान द्विफसली खेती की ओर बढ़े हैं।
​एफपीओ और महिला समूहों की सहभागिता: कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) और स्व-सहायता समूहों के जरिए किसानों को सीधे बाजार से जोड़ा गया, जिससे उनके कृषि उत्पादों का उचित मूल्य मिल रहा है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है।
​प्रशासन की कर्मठता और किसानों के विश्वास का संगम
​कलेक्टर एवं जिला प्रशासन के कुशल मार्गदर्शन और कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारियों की अथक मेहनत ने इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया। दूरस्थ एवं संवेदनशील गांवों तक पहुंचकर कृषि विस्तार अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा। बस्तर के प्रगतिशील किसानों ने भी परंपरागत सोच से आगे बढ़कर योजनाओं को अपनाया।
​"यह उपलब्धि जिले के मेहनतकश किसानों के पसीने और कृषि विभाग के मैदानी अमले के समर्पण का परिणाम है। 100 चयनित जिलों में देश में 5वां और छत्तीसगढ़ में पहला स्थान पाना यह साबित करता है कि संकल्प मजबूत हो तो भौगोलिक बाधाएं विकास को नहीं रोक सकतीं।"
— जिला प्रशासन, दंतेवाड़ा
​दंतेवाड़ा का यह प्रदर्शन न केवल अन्य आकांक्षी व जनजातीय जिलों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल है, बल्कि यह दर्शाता है कि पारदर्शी प्रशासनिक कार्यशैली और किसान-केंद्रित नीतियों से सुदूर अंचलों में भी राष्ट्रीय स्तर का बदलाव लाया जा सकता है।